देश में राम मंदिर निर्माण को लेकर छिड़ी बहस के बीच मंगलवार को रामनगरी अयोध्या दीपों से सजाई जा रही है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में आज अयोध्या में ऐतिहासिक दीपोत्सव मनाया जाएगा. इस भव्य आयोजन की साक्षी दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम जंग सूक भी रहेंगी, वह सोमवार को ही लखनऊ भी पहुंच गई हैं.
मंंगलवार दोपहर को अयोध्या में झांकी निकलना शुरू हो गया है. रामायण के किरदारों के साथ अयोध्या के सड़कों पर झांकी निकाली जा रही है. इस दौरान हजारों की भीड़ सड़कों पर उतरी है.
छोटी दिवाली के अवसर पर अयोध्या में सरयू नदी के तट पर ना सिर्फ आज लाखों दीपक जलेंगे बल्कि लेज़र लाइट की झलक भी दिखाई जाएगी. वहीं, भव्य रामलीला का मंचन भी होगा.
पिछले कुछ दिनों से देशभर में संत समाज, राजनीतिक दलों और रामभक्तों की तरफ से अयोध्या में रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की मांग बढ़ी है, ऐसे में अयोध्या में मनाई जा रही ये भव्य दिवाली संतों को संतुष्ट भी कर सकती है.
बनेगी राम की मूर्ति?
राम मंदिर को लेकर सीएम क्या घोषणा करने वाले हैं, इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है. कयास लगाए जा रहे हैं कि राम मंदिर के बारे में कोई घोषणा हो सकती है. दूसरी ओर ,कहा जा रहा है कि योगी की योजना बाहर आ चुकी है.
अयोध्या में सरयू के किनारे 151 मीटर ऊंची भगवान राम की तांबे की मूर्ति बनवाने की घोषणा योगी करने वाले हैं. इतना तो तय है कि योगी जो भी घोषणा करेंगे उसका समर्थन और विरोध होना तय है. क्योंकि संतों ने पहले ही ऐलान कर रखा है कि उन्हें ऊंची प्रतिमा नहीं राम मंदिर चाहिए.
कैसा होगा आज का प्रोग्राम?
दोपहर 3 से 3.15 बजे- सुदर्शन पटनायक की बनाई राम की बालू की प्रतिमा का यूपी के सीएम आदित्यनाथ, राज्यपाल राम नाईक, दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला सूक राम बाजार में अनावरण करेंगे.
राजनीतिक दलों को कॉरपोरेट चंदा देने के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड की छठवें चरण की बिक्री चल रही है. यह बिक्री 1 नवंबर से शुरू हुई है और 10 नवंबर 2018 तक जारी रहेगी. इलेक्टोरल बॉन्ड को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की देशभर में चिन्हिंत 29 शाखाओं में बेचा जा रहा है. जहां 10 नवंबर तक इन शाखाओं से चंदा देने के लिए बॉन्ड खरीदा जा सकता है वहीं राजनीतिक दलों को खरीदे गए बॉन्ड को 15 दिनों के अंदर कैश कराना होगा.
प्रमुक बिजनेस अखबार इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक मौजूदा वित्त वक्ष में राजनीतिक चंदा देने वाले सबसे बड़े ट्रस्ट प्रूडेंट इलोक्टोरल ट्रस्ट ने कुल 169 करोड़ रुपये एकत्र किए हैं. इस पैसे में लगभग 144 करोड़ रुपये से प्रूडेंट ने बीजेपी के इलोक्टोरल बॉन्ड खरीदे हैं वहीं बाकी की रकम (24 करोड़ रुपये) से अन्य पार्टियों के बॉन्ड खरीदे गए हैं.
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गौरतलब है कि प्रूडेंट इलेक्टोरल बॉन्ड मौजूदा समय में पोलिटिकल फंडिग करने वाला सबसे बड़ा ट्रस्ट है. दो साल पहले तक प्रूडेंट ट्रस्ट राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए काम करता था. इस ट्रस्ट में देश की नामी-गिरामी कंपनियां शामिल हैं जिसमें 52 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा चंदा डीएलएफ समूह ने दिया है. इसके अलावा ट्रस्ट में भारती ग्रुप (33 करोड़), श्रौफ समूह की यूपीएम (22 करोड़) और गुजरात का टॉरेंट समूह प्रमुख कंपनियां है. इसके अलावा डीसीएम श्रीराम, कैडिला ग्रुप और हल्दिया एनर्जी ने भी इस ट्रस्ट के जरिए प्रमुख राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल ट्रस्ट के चंदा देने का काम किया है.
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गौरतलब है कि रिपोर्ट के मुताबिक इस ट्रस्ट की तरफ से 10 करोड़ रुपये का चंदा कांग्रेस को और 5 करोड़ रुपये का चंदा ओडिशा में बीजू जनता दल को दिया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में इलेक्टोरल बॉन्ड मार्केट में मौजूद सभी ट्रस्ट के जरिए लगभग 85 फीसदी चंदा बीजेपी को मिला हैं. जहां सबसे बड़े ट्रस्ट ने लगभग 90 फीसदी चंदा बीजेपी को दिया है वहीं दूसरे और तीसरे नंबर के ट्रस्ट ने भी सर्वाधिक राजनीतिक चंदा बीजेपी को दिया है. दूसरे नंबर पर मौजूद एबी जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट ने मौजूदा वर्ष के दौरान कुल 21 करोड़ का चंदा दिया है जिसमें 12.5 करोड़ बीजेपी, 1 करोड़ कांग्रेस और 8 करोड़ रुपये बीजेडी को दिया है. वहीं दक्षिण भारत के एक इलेक्टोरल ट्रस्ट मुरुगप्पा ट्रस्ट ने 1 करोड़ रुपये का चंदा बीजेपी तो 2 करोड़ रुपये का चंदा कांग्रेस को दिया है.
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